Aarogya Setu app:आरोग्य सेतु पर विपक्ष का आरोप / राहुल गांधी ने कहा- ऐप से डेटा सुरक्षा और निजता को खतरा

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Aarogya Setu app

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में तमाम देश टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत सरकार ने दो अप्रैल को आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च किया था। इस ऐप की मदद से आसपास के कोविड 19 मरीज़ के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है।आरोग्य सेतु ऐप के लॉन्च होने के कुछ ही समय में दो करोड़ से अधिक लोगों ने इसे डाउनलोड किया है। सरकार का यह एप लोगों को कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे और जोखिम का आकलन करने में मदद करता है।
पर अब इस ऐप पर विवाद उठता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने शनिवार को लॉकडाउन और आरोग्य सेतु ऐप को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। विपक्षी दल ने कोरोना महामारी से लड़ाई में सरकार की कोशिशों को लेकर स्थिति साफ करने की मांग की है।

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोग्य सेतु ऐप पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्वीट के जरिए राहुल गांधी ने कहा कि इस ऐप से डेटा सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं।राहुल गांधी ने कहा, ‘आरोग्य सेतु ऐप एक जटिल निगरानी प्रणाली है, जो एक प्राइवेट ऑपरेटर के लिए आउटसोर्स है, जिसमें कोई संस्थागत निरीक्षण नहीं है। इससे गंभीर डेटा सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं।तकनीक हमें सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है, लेकिन नागरिकों की सहमति के बिना उनको ट्रैक करने के लिए डर का फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए।नीति आयोग ने ऐप में जीपीएस तकनीक के इस्तेमाल का बचाव किया है। आयोग ने कहा कि जीपीएस का इस्तेमाल करने से नए हॉटस्पॉट का पता लगाने में मदद मिलती है। राहुल से पहले भी कुछ विशेषज्ञों ने इस ऐप में निजता से समझौता किए जाने की बात कही थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें जीपीएस आधारित डेटा लोकेशन का इस्तेमाल चिंता की बात है। ऐप को जरूरत से ज्यादा डेटा चाहिए। इसके साथ गुणवत्ता भी दूसरे देशों के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप की तुलना में कम है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरोग्य सेतु ऐप को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अहम बता चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से आरोग्य सेतु ऐप को मोबाइल में डाउनलोड करने की अपील कर चुके हैं।पीएम मोदी ने कहा था, ‘तकनीक की मदद से यह हमें अहम जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस ऐप को जितने ज्यादा से ज्यादा लोग इस्तेमाल करेंगे, यह उतना ही प्रभावी बनेगा।सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप को सभी सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों के लिए डाउनलोड करना जरूरी कर दिया है। अगर किसी प्राइवेट कर्मचारी के मोबाइल में यह ऐप नहीं मिला तो उसकी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, कंपनी के प्रमुख पर इसकी जवाबदेही भी होगी कि उसके सभी कर्मचारी इस ऐप को डाउनलोड कर लें। हालांकि, घर से काम करने वालों को इसे डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है।

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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी ऐप पर किए गए सवाल का जवाब दिया। उन्होंने ट‌्वीट किया, ‘‘हर दिन एक नया झूठ। यह ऐप लोगों की रक्षा करने वाला एक शक्तिशाली साथी है। इसकी डेटा सुरक्षा की प्रणाली मजबूत है। जो लोग अपनी पूरी जिंदगी खुद ही सर्विलांस करने में शामिल रहे वे नहीं समझ सकते कि अच्छाई के लिए तकनीक का फायदा कैसे उठाया जा सकता है।’’गोपनीयता की वकालत करने वाले कार्यकर्ताओं ने इसके इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मोबाइल ऐप बड़े पैमाने पर निगरानी का एक और साधन बन सकता है। इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन ने हाल के एक पेपर में कहा कि आरोग्य सेतु ऐप “गोपनीयता के अधिकार के साथ असंगत है और यह सामूहिक रूप से निगरानी की एक स्थायी प्रणाली के लिए एक जोखिम है”।

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