मई तो शुरुआत है, जून-जुलाई में चरम पर पहुंच सकती है कोरोना का संक्रमण’ : एम्स के डायरेक्टर की चेतावनी

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aiims director

जब से मई का महीना शुरू हुआ है, कोरोना के मामलों की रफ्तार तेज गई है। महाराष्ट्र, गुजरात के बाद अब दिल्ली में बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहले कहा जा रहा था कि मई, जून के महीने में जब देश में गर्मी बढ़ने लगेगी तो कोरोना के मामलों में कुछ कमी आ सकती है पर ऐसा कुछ फिलहाल दिख नहीं रहा है।लॉकडाउन और अन्य कदम उठाए जाने के बावजूद अभी इसके मामले बढ़ रहे हैं। इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डायरेक्टर ने कहा कि देश में कोविड-19 महामारी अभी अपने शिखर पर नहीं पहुंची है।

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कोरोना को लेकर एम्‍स के डायरेक्‍टर ने एक सनसनीखेज बयान दिया है। उन्‍होंने कहा है कि जून-जुलाई में कोरोना अपने चरम पर होगा। एम्‍स के डायरेक्‍टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जांच नमूने की डाटा का अध्‍ययन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि जिस तरह से भारत देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह बीमारी जून-जुलाई में अपने चरम पर होगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन के चलते कोविड-19 पॉजिटिव मामलों में कमी जरूर आई है पर अब भी हर रोज मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। भारत में अब तक 52 हजार से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। दिल्ली स्थित AIIMS के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि जून के महीने में कोरोना वायरस के मामले सबसे ज्यादा होने की पूरी संभावना है।

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एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि जिस तरीके से ट्रेंड दिख रहा है, कोरोना के केस जून में पीक पर होंगे। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि बीमारी एक बार में ही खत्म हो जाएगी। हमें कोरोना के साथ जीना होगा। धीरे-धीरे कोरोना के मामलों में कमी आएगी।उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण फिर भी ये आंकड़े कम हैं वरना मामले बहुत ज्यादा बढ़ जाते। अस्पतालों ने लॉकडाउन में अपनी तैयारी कर ली है।डॉक्टर्स को प्रशिक्षण दिए गए हैं। पीपीई किट्स, वेंटिलेटर और जरूरी मेडिकल उपकरणों के इंतजाम हुए हैं। कोरोना की जांच बढ़ी है।
कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के तमाम उपायों पर विचार और शोध किया जा रहा है लेकिन हालात सुधरते नहीं नजर आ रहे हैं।वैक्सीन नहीं होने के चलते सरकार ने कोरोना संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन का रास्ता अपनाया है।कोरोना से केरल में सबसे ज्यादा रिवकरी रेट और सबसे कम मरनेवालों की संख्या रही, जबकि सिक्कम मात्र एक ऐसा राज्य है जहां पर कोविड-19 का एक भी केस नहीं आया है।

 

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