TRP Scam case: पार्थ दासगुप्ता ने कबूला रेटिंग फिक्सिंग के बदले अरनब ने तीन साल में दिए 40 लाख रुपये

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टीआरपी स्कैम केस में रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) इंडिया के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता ने मुंबई पुलिस को दिए लिखित बयान में दावा किया है कि अरनब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने उन्हें न्यूज चैनल के पक्ष में रेटिंग देने के लिए तीन साल में कुल 40 लाख रुपये दिए थे. इसके अलावा अरनब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने उन्हें दो फैमिली ट्रिप के लिए 12000 यूएस डॉलर (तकरीबन 8,75,910 रुपये) दिए थे. मुंबई पुलिस ने 11 जनवरी को 3,600 पेज की सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें BARC की एक फरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट, दासगुप्ता और गोस्वामी (Arnab Goswami) के बीच कथित वॉट्सऐप चैट और पूर्व काउंसिल कर्मचारी और केबल ऑपरेटर समेत 59 लोगों के बयान शामिल हैं.

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पार्थो दासगुप्ता ने मुंबई पुलिस को दिए गए लिखित बयान में बताया है कि वह अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) को साल 2004 से जानते हैं. जब वह दोनों एक साथ टाइम्स नाउ न्यूज़ चैनल में काम किया करते थे. पार्थो दासगुप्ता ने बताया कि साल 2013 में मैंने बार्क के सीईओ का पद ग्रहण किया. उस दौरान अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) टाइम्स नाउ के लिए काम करते थे. उन्होंने दावा किया है कि अपनी टीम के साथ मिलकर टीआरपी रेटिंग के साथ छेड़छाड़ का काम किया जिससे कि अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) के चैनल की टीआरपी रेटिंग बढ़े. अरनब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने 2017 में रिपब्लिक लॉन्च किया। रिपब्लिक टीवी की लॉन्चिंग से पहले ही उसने मुझे लॉन्चिंग प्लान के बारे में बताया था और इशारों-इशारों में उसके चैनल के लिए अच्छी रेटिंग देने में मदद मांगी थी. गोस्वामी (Arnab Goswami) अच्छी तरह जानते थे कि मुझे पता है कि टीआरपी सिस्टम कैसे काम करता है. उन्होंने भविष्य में मेरी मदद की बात कही.

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