वैज्ञानिक बना रहे ऐसा मास्क, जो कोरोना वायरस के संपर्क में आते ही रंग बदल लेगा

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corona mask

कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलते ही पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस वायरस को खत्म करने के लिए कई बड़ी रिसर्च कर रहे हैं। चीन से शुरु हुए कोरोना वायरस ने दुनिया में तबाही मचा दी हैं। इस वायरस की वजह से लाखों लोगों की मौत हो गई। तो वहीं संक्रमित मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा हैं। वैज्ञानिक लगातार इसके समाधान के उपायों को तलाश कर रहे है। वैज्ञानिकों ने अब तक कई तरह के मास्क का इजाद किया है पेर इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने जीका और ईबोला वायरस के लिए ऐसे मास्क बनाए थे जो इन वायरस के छूते ही सिग्नल कर देता था। अब वैज्ञानिक कोरोना वायरस की पहचान के लिए ऐसा मास्क बना रहे हैं जो वायरस के संपर्क में आते ही रंग बदलेगा। वैज्ञानिक इस मार्क में ऐसे सेंसर्स को जोडेंगे। जो कोरोना वायरस के संपर्क में आते ही अपना रंग बदलने लगेंगे और आपको बता देंगे कि कोरोना का खतरा है या नहीं।

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साल 2014 में मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा मास्क तैयार किया था जो जीका और ईबोला वायरस के संपर्क में आते ही सिग्नल देने लगता था। अब इन्हीं संस्थानों के वैज्ञानिक कोरोना वायरस के लिए ऐसा मास्क बना रहे हैं जो वायरस के संपर्क में आते ही रंग बदलने लगेगा। एमआईटी और हार्वर्ड के वैज्ञानिक जो मास्क बना रहे हैं, उसके वायरस के संपर्क में आते ही ग्लो यानी चमकने लगेगा। इस मास्क की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक जिम कॉलिंस ने कहा कि इस मास्क के सामने जैसे ही कोई कोरोना संदिग्ध सांस लेगा, छिकेगा या फिर खांसेगा। तो इस मास्क का कलर तुरंत बदल जाएगा। ये मास्क बिल्कुल वैसा ही होगा। जैसे आपकी एयरपोर्ट में जांच के होती है। हालांकि अभी तक इस प्रोजेक्ट पर हमने काम शुरू कर दिया है। जो अपने शुरुआती दौर में है। कॉलिंस ने बताया कि अगर ये तकनीक सफल हो जाएगी। तो कोरोना मरीजों की पहचान आसान से होगी। इस मास्क के अंदर कोरोना वायरस का डीएनए और आरएनए आएगा। जो की तुरंत मास्क के अंदर मौजूद लायोफिलाइजर के साथ जुड़कर रंग बदल लेगा। ये मास्क लंबे समय तक उपयोग में लिया जा सकता है। वायरस का जेनेटिक सिक्वेंस मास्क के संपर्क में आते ही मास्क एक से तीन घंटे के बीच मास्क फ्लोरोसेंट रंग में बदल जाएगा। जिम ने बताया कि अगले कुछ ही दिनों में हम इस मास्क का ट्रायल करेंगे। जिसमे हमे सफलता मिलने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने बताया है कि इस मास्क में पेपर बेस्ड डायग्नोस्टिक के बजाय प्लास्टिक, क्वार्ट्ज और कपड़े का उपयोग कर रहे हैं।

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