किसान आंदोलन के बीच हरियाणा के किसानों ने किया नए कृषि बिल का समर्थन, नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपी चिट्ठी

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farmers protest

जहां एक तरफ नए कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन (Farmers Protest) चल रहा है वहीं हरियाणा के किसान इस कानून के समर्थन में उतर आए हैं. हरियाणा के किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) से मुलाकात की है. इन किसानों ने कृषि मंत्री को नए कृषि कानूनों (Farm Laws 2020) को रद्द न करने की मांग की है. इस बाबत उन्होंने कृषि मंत्री को समर्थन की एक चिट्ठी भी सौंपी है. किसानों ने कृषि मंत्री को नए कृषि कानूनों को समर्थन देते हुए यह मांग की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मंडी व्यवस्था (APMC) जारी रहनी चाहिए. किसानों ने कहा है कि भले ही कानून में कुछ सुधार किए जाएं लेकिन रद्द न किया जाए क्योंकि ये कानून किसानों को फायदा पहुंचाने वाले हैं. किसानों ने केंद्र सरकार से इसके द्वारा प्रस्तावित तीन कानूनों में संशोधन के साथ आने का आग्रह किया और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि उनकी मांगों को समय पर पूरा किया जाए और उनके मुद्दों को ठीक से सुना जाए.

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केंद्र की ओर से लागू किए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी हैं.
हरियाणा के किसानों के एक समूह ने इन कानूनों में आवश्यक संशोधन के लिए केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.
हरियाणा एफपीओ (किसान निर्माता संगठन) और जागरुक और प्रगतिशील किसान यूनियन के एक दर्जन से अधिक किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उनके मंत्रालय में एक बैठक के दौरान इस संबंध में एक लिखित स्वीकृति दी. वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा है, भारत सरकार के द्वार 24 घंटे किसानों के लिए खुले हैं. मैं समझता हूं कि अगर ये किसान आंदोलन माओवादी और नक्सल ताकतों से मुक्त हो जाए, तो हमारे किसान भाई-बहन जरूर समझेंगे कि किसान के ये बिल उनके और देशहित के लिए हैं. आंदोलनरत किसानों ने हालांकि सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है. उनका कहना है कि जब तक सरकार किसान विरोधी काले कानूनों को वापस नहीं ले लेती, उनका आंदोलन जारी रहेगा.

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