नेपाली PM ने भारत के खिलाफ उगला जहर, बोले- भारतीय वायरस चीन और इटली से ज्यादा घातक है

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भारत और नेपाल के रिश्तों के बीच तल्खी और बढ़ती ही जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने मंगलवार को भारत के खिलाफ नया नया प्रोपेगेंडा शुरू किया है। भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर दावा करने वाले “नए नक्शे” के बाद, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने भारत के खिलाफ आक्रामक बयान दिया है। उन्होंने संसद में दिए एक भाषण में कहा कि “भारतीय वायरस” चीनी और इतालवी वायरस की तुलना में अधिक घातक लगता है। ओली ने नेपाल में कोरोना वायरस के प्रसार के लिए भारत को दोषी ठहराया। नेपाली संसद के अपने भाषण में केपी ओली ने कूटनीतिक मर्यादा को लांघते हुए भारत को लेकर विवादित बयान दिया है। नेपाली पीएम ने मंगलवार को अपने भाषण में कहा, जो लोग गैरकानूनी तरीकों से भारत से आ रहे हैं वो यहां कोरोना का संक्रमण फैला रहे हैं और इसके लिए कुछ स्थानीय नेता और प्रतिनिधि भी जिम्मेदार हैं जो बिना किसी प्राथमिक जांच के लोगों को भारत से लेकर आ रहे हैं। ओली ने कहा, भारत से आए लोगों में इटली और चीन से लौटने वालों के मुकाबले कोरोना के गंभीर संक्रमण मिले हैं।

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। पहले भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल के नया राजनीतिक नक्शा जारी करने से विवाद खड़ा किया। और अब कोरोना महामारी को लेकर भारत के खिलाफ एक बड़ा बयान दिया है। इसके साथ ही कहा कि तिब्बत, चीन और भारत से सटे कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा को किसी भी कीमत पर वापस लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ओली ने भारत का नाम लिए बगैर कहा कि अब हम लगातार इन इलाकों को कूटनीतिक जरिए से वापस लाने में जुटेंगे। अगर इससे कोई नाराज होता है तो हमें फर्क नहीं पड़ता। इन क्षेत्रों के लेकर भारत और नेपाल के बीच काफी समय से सीमा विवाद जारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 8 मई को एक नई सड़क (उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को चीन के कैलाश मानसरोवर मार्ग सेजोड़ती है) का उद्घाटन करने के बाद, नेपाल ने इसका विरोध किया था और क्षेत्र में एक सुरक्षा चौकी लगाने पर भी विचार कर रहा है। इंडियन आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने कहा था कि कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा पर नेपाल के विरोध के पीछे किसी और का हाथ है।

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