सुप्रीम कोर्ट: संविधान से इंडिया शब्द हटाकर देश का नाम भारत रखने की मांग, क्या भारत के नाम से हट जाएगा ‘इंडिया’

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यदि हम भारत की बात करें तो कई लोग इसे इंडिया कहकर संबोधित करते हैं और कई लोग इसे हिंदुस्तान कहते हैं। लोग सवाल उठाते रहे हैं कि भारत का ‘इंडिया’ से क्या संबंध है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करके इंडिया शब्द समाप्त करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इंडिया गुलामी का प्रतीक है और समूचे देश को केवल भारत या हिंदुस्तान नाम से पहचान मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट 2 जून को संवैधानिक तौर पर देश के अंग्रेजी नाम इंडिया को भारत से बदलने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करेगा। यह सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच में होगी। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सीजेआई की गैर-मौजूदगी के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया। याचिका में शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि वह सरकार को अनुच्छेद 1 में बदलाव करने का निर्देश दे। इसमें देश के नाम का उल्लेख है।

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दिल्ली के रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी याचिका में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन कर इंडिया शब्द हटा दिया जाए। अभी अनुच्छेद 1 कहता है कि भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा। याचिका में कहा गया है कि इसकी जगह संशोधन करके इंडिया शब्द हटा दिया जाए और भारत या हिन्दुस्तान कर दिया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि इंडिया शब्द गुलामी का प्रतीक लगता है। देश को मूल और प्रमाणिक नाम भारत से ही मान्यता दी जानी चाहिए।
उनका कहना है कि ऐसा करने से हमें तानाशाही अतीत से छुटकारा मिलेगा और स्वतंत्रता आंदोलन में सेनानियों का बलिदान सार्थक हो पाएगा। याचिका में कहा गया है कि अंग्रेजी नाम का हटना भले ही प्रतीकात्मक होगा लेकिन यह हमारी राष्ट्रीयता, खास तौर से भावी पीढ़ी में गर्व का बोध भरने वाला होगा। दरअसल इंडिया शब्द की जगह भारत किया जाना हमारे पूर्वजों द्वारा स्वतंत्रता संघर्ष में की गई कठिन भागीदारी को न्यायसंगत ठहराएगा। साल 1948 में संविधान के तत्कालीन मसौदे के अनुच्छेद 1 पर संविधान सभा में हुई बहस का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है कि उस वक्त भी देश का नाम भारत या ‘हिंदुस्तान’ करने के पक्ष में मजबूत लहर थी। लेकिन तब ये संभव नहीं हो सका था।अब दो जून को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता में इस मामले की सुनवाई होगी।

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